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Friday, November 25, 2011

240 दिन से ऊपर काम तो पक्की करो नौकरी


सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अस्थायी रूप से 240 दिन से अधिक काम करने वाला कर्मचारी पक्की नौकरी का हकदार हो जाता है। यह जरूरी नहीं कि 240 दिन की अवधि एक कलेंडर वर्ष में पूरी की गई हो। अगर 240 दिन की अवधि दो कलेंडर वर्ष है तो भी उसे स्थायी रोजगार देना पड़ेगा। जस्टिस अशोक कुमार गांगुली और जगदीश सिंह केहर की बेंच ने मैसूर स्टेट बैंक के कर्मचारी एचएस राजशेखर की याचिका स्वीकार करते हुए बैंक को उसे पक्की नौकरी पर रखने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने बैंक के इस तर्क को खारिज कर दिया कि 240 दिन की गणना एक कलेंडर वर्ष में की जाती है। अदालत ने कहा कि बैंक और उसकी यूनियन के बीच हुए द्विपक्षीय समझौते में साफतौर पर कहा गया है कि कलेंडर वर्ष के अलावा एक ब्लॉक में किए गए काम को भी 240 दिन की गणना करते समय मान्यता दी जाएगी। कलेंडर वर्ष और एक ब्लॉक के 12 महीने परिवर्तनीय हैं। कलेंडर वर्ष के अलावा 12
महीने के ब्लॉक में लगातार 240 दिन से ज्यादा अस्थायी नौकरी की गई है तो वह पक्की नौकरी का हकदार है। सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को भी नकार दिया कि 240 दिन तक बैंक की एक ही शाखा में काम किया गया हो, तभी स्थायी नौकरी की अर्जी पर विचार किया जा सकता है। अदालत ने समानता के अधिकार के तहत भी राजशेखर के दावे को सही ठहराया। राजशेखर ने कहा कि उसके साथी देवराजू को स्थायी नौकरी दे दी गई जबकि उसकी अर्जी को बैंक ने खारिज कर दिया। देवराजू को भी 240 दिन के आधार पर अधीनस्थ स्टाफ में समायोजित कर लिया गया। कर्नाटक हाई कार्ट की एकल और खंडपीठ ने राजशेखर की याचिका खारिज कर दी थी। उसका दावा था कि वह बैंक में 1985 से काम कर रहा है। 1994-95 में उसने 292 दिन तक लगातार काम किया। उसके पास न्यूनतम शैक्षिक योग्यता है। बैंक के नियमों के अनुसार 240 दिन तक काम करने पर वह बैंक में स्थायी होने का हकदार है। स्टेट बैंक ऑफ मैसूर की कर्मचारी यूनियन भी उसे स्थायी करने की सिफारिश कर चुकी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत समानता के अधिकार पर गौर नहीं किया। याची ने अपने साथी को पक्की नौकरी का उदाहरण दिया जिसे समान आधार पर नौकरी दी गई थी। 1999 में भी याची ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। अदालत ने बैंक को उसकी अर्जी पर विचार करने का आदेश दिया था। अदालत के आदेश पर भी बैंक ने उसे स्थायी नौकरी पर रखने से इनकार कर दिया। उसके बाद याची ने फिर हाई कोर्ट में दस्तक दी। दो राउंड की याचिका में सही तथ्यों पर ध्यान नहीं दिया गया। हाई कोर्ट ने माना कि राजशेखर ने लगातार 292 दिन तक काम किया और उसके साथी देवराजू को इसी आधार पर नौकरी दी गई। फिर भी उसकी याचिका खारिज कर दी गई। बैंक के अपने नियमों के अनुसार भी वह स्थायी रोजगार का हकदार है। बैंक ने 1988 में यह नियम लागू किया था और इस संबंध में यूनियन से समझौता भी किया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि श्रमिक संबंधी मामलों में कलेंडर वर्ष और ब्लॉक के 12 महीने समान अर्थ रखते हैं। 12 महीनों के ब्लॉक में 240 दिन तक किया गया काम नियमों के तहत वैध है।